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Home All Updates (209) ⚛️ टेलिकाइनेसिस ( Te
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⚛️ टेलिकाइनेसिस ( Telekinesis) की विधि ⚛️ Telekinesis = अर्थात दूरस्थ वस्तु को अपनी मानसिक शक्ति से नियंत्रित करना । टेलेकिनेसिस के लिए सर्वप्रथम तीन चीज़ो पर ध्यान देना होगा।। १• कॉन्सेंट्रेशन ( एकाग्रता ) #sadhakanshit २• इमॅजिनेशन & विज्यूलाइज़ेशन (कल्पनाशीलता ) ३• प्राण उर्जा & प्रॅक्टीस (अभ्यास) कॉन्सेंट्रेशन ( एकाग्रता ) - एकग्रता का मतलब होता है , लम्बे समय तक एक ही विषय पर टीके रहना, telekinesis मे सफलता पाने के लिए एकग्रता का अभ्यास अच्छा होना चाहिए । इसलिए जो कोई भी मित्र इसका अभ्यास करना चाहते है , उन्हे पहले अपनी एकाग्रता को बढ़ाना चाहिए, क्योंकि एकाग्र मन में जो शक्ति होती है वह अतुलनीय है | एकग्रता को बढाने के वैसे तो कई तरीके है | फिर भी सुविधा की दृष्टि से कुछ तरीके नीचे दिए जा रहे है | त्राटक :- त्राटक सबसे बढ़िया और सुगम तरीका है..... 5 मिनट से लेकर 20 मिनट तक त्राटक किया जा सकता है . अब त्राटक मे भी कई विधियां है... आप अपनी सुविधानुसार चुन सकते है । इमॅजिनेशन या विज्वलाइज़ेशन(कल्पनाशीलता) - इसमे हम जो कुछ भी सोचते है उसकी हूबहू तस्वीर अपने मानस पटल पर बनाना होता है और उसे महसूस करना होता है। इसको बढ़ाने के लिए रूप साधना का अभ्यास करना चाहिए , या फिर अपनी किसी यात्रा की कहानी को अपने ही दिमाग़ में चलाना चाहिए । पूरा समय दे और एक एक पिक्चर को सही से बनाए या इसके बजाय आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी ध्यान प्रक्रिया का अभ्यास कर सकते है । प्राण ऊर्जा और अभ्यास :- मित्रो इसके लिए प्राणाकर्षण प्राणायाम का अभ्यास करना होता है | ⚛️ प्राणाकर्षण प्राणायाम ⚛️ ️ सबसे पहले एक शांत स्थान का चयन करें फिर किसी निश्चित आसान जो आपको उचित जान पडे , में बैठे, बैठने की स्थिति इनमे से चुन लें ( सुखासन , सिद्धासन , पद्मासन ) फिर धीरे धीरे अपना ध्यान भ्रकुटी मे लाए ओर भावना करें की आप निखिल ब्रह्मांड में अकेले बैठे है। आपके चारो ओर नीले प्रकाश का प्रकाश पुंज या औरा बना हुआ है , आपके चारो और प्राण ऊर्जा का समुंदर लहरा रहा है ओर अब ध्यान सुर्य चक्र पर ले जाइये और अब अपनी श्वास के साथ यह भावना करें कि आप प्राण ऊर्जा को अपने सूर्य चक्र मे एकत्र कर रहे है । ध्यान रहे यह केवल सोचना ही नहीं बल्कि भावना मे महसूस भी होना चाहिए ...... ऐसे ही अभ्यास करते करते 15 - 20 दिन मे इतनी प्राण ऊर्जा एकत्रित हो जाएगी की इसका अलग से प्रयोग किया जा सके ....। ⚛️ प्राण उर्जा के शरीर में प्रकट होने के चिन्ह :- ️ ध्यान के समय शरीर के बालों का खड़े हो जाना । ️ ध्यान या २-३ किमी. पैदल चलने के बाद , किसी चालक चीज को छुने पर करंट का झटका लगना । ️ सर्दी में गर्मी और गर्मी में सर्दी को महसूस करना । सम्पूर्ण शरीर हमेशा ऊर्जावान रहना । ⚛️टेलिकाइनेसिस अभ्यास :- 15-20 दिन का नियमित ध्यान करने के बाद आप टेलेकिनेसिस का अभ्यास कर सकते है , इसके अभ्यास के लिए शुरुआत मे सुबह का समय बेहतर है । अपने उपरोक्त प्रयोग से फ्री होने के बाद आसान पर बैठे .... ⚛️ हाथो में एनर्जी का फ्लो कैसे करें ⚛️ ️ दोनो हाथ एक दूसरे के सामने लगभग 1 सेंटीमीटर की दूरी पर रखें ओर भावना करें की आपके हाथो मे एनर्जी फ्लो हो रही है , आपको ठंडा या गर्म महसूस होने लगेगा , किसी को ठंडा ओर किसी को गर्म महसूस होता है , ओर फिर धीरे धीरे दूर, फिर पास लाए , फिर दूर ले जाए , दूरी बढ़ाते रहें जबतक कि दोनो हाथ एक दूसरे को आकर्षित करते रहें ..... जब यह दूरी बढ़कर 10 सेंटिमिटर हो जाए .....तो आगे बढ़े ! साधक अंशित वेबसाइट : https://sadhakanshit.wordpress.com अब एक कोरे कागज को 4-5 सेंटिमिटर का वर्गाकार आकृति में काटें और उसके विपरित कोनों को आपस में मिलाते हुये एक ही दिशा में फोल्ड ( मोड़े ) करे, तो एक पिरामिड की आकृति जैसी एक आकृति बन जाएगी ! अब इसे किसी नुकीली वस्तु पर रख दे । ध्यान रहै कमरे की खिड़की दरवाजे बंद रहे , जिससे की वह स्थिर रहे । ️अब धीरे धीरे हाथो मे एनर्जी का फ्लो करके हाथ धीरे से उसके पास ले जाए ओर उसे आदेश करें दृढ़ संकल्प के साथ कागज को घूमने के लिए ...... थोड़ी ही देर मे वो आपके अनुसार घूमने लगेगा .......... अगर नहीं घुमें तो परेशान होने की जरूरत नहीं , इसके और भी तरीके है, पर सबसे सरल यही होगा । ️यदि आप इस प्रयोग के साथ मेरे अन्य ध्यान विधियों से सम्बंधित विडियो देखना चाहते है तो इस नीचे दिये गये लिंक के माध्यम से सकते है ! ️मित्रो इस संपूर्ण प्रयोग के दौरान संयम से रहें .....वरना ये सब प्रयास बेकार हो जाएगा . अति किसी भी चीज़ की अच्छी नहीं होती !!! साधक अंशित फेसबुक पेज: https://www.facebook.com/sadhakanshitji #sadhakanshit | Sadhak Anshit | Meditation Classes By Sadhak Anshit
  • 2017-12-03T14:37:13

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बद्ध पद्मासन पद्मासन का अर्थ और उसके करने का तरीका : “पद्म” अर्थात् कमल। जब यह आसन किया जाता है, उस समय वह कमल के समान दिखाई पड़ता है। इसलिए इसे ‘पद्मासन’ नाम दिया गया है। यह आसन “कमलासन’ के नाम से भी जाना जाता है। ध्यान एवं जाप के लिए इस आसन का मुख्य स्थान होता है। यह आसन पुरुषों और स्त्रियों दोनों के लिए अनुकूल योग में बद्ध पद्मासन एक विशेष स्थान रखता है। बद्ध पद्मासन में दोनों हाथों से शरीर को बांधा जाता है। इसलिए इसे बद्ध पद्मासन कहा जाता है। इस आसन को भस्मासन भी कहा जाता है। यह आसन कठिन आसनों में से एक है। वैदिक वाटिका आपको बता रही है बद्ध पद्मासन के फायदे और इसे करने का तरीका। सबसे पहले जानते हैं बद्ध पद्मासन योग के फायदे इस आसन से : दुबलापन दूर होता है और शरीर में ताकत आती है। छाती चौड़ी होती है। गर्दन, पीठ और पीठ का दर्द ठीक होता है। जो लोग कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं उनके लिए यह आसन बहुत फायदेमंद होता है। फेफड़े, जिगर और दिल संबंधी रोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। रक्त संचार तेज होता है। बद्ध पद्मासन करने की विधि भूमि पर दोनों पैर फैला कर सीधे बैठे। फिर दायाँ पैर बाएँ पैर की जाँघ पर और बायाँ पैर दाएँ पैर की जाँघ पर रखें। वैसे कुछ लोगों को पहले दाएँ जाँघ पर बायाँ पैर और फिर बाई जाँघ पर दायाँ पैर रखने में आसानी होती है।आप चाहे तो ऐसा भी कर सकते है। फिर इमेज (चित्र) में बताए अनुसार दोनों हाथों के अंगूठो को तर्जनियों के साथ मिला कर बायाँ हाथ बाएँ पैर के घुटने पर और दायाँ हाथ दाएँ पैर के घुटने पर रखें। याद रहे की हथेलियाँ ऊपर की ओर हों। मेरुदंड और मस्तक सीधी रेखा में रखें। आँखों को बंद या खुली रखें। सबसे पहले आप जमीन पर कोई दरी या कंबल बिछाकर बैठ जाएं। आपकी एड़ियां पेट के निचले भाग से सटी हुई हों। पंजे जांघों से बाहर निकालें अब अपनी बांई भुजा को पीछे की ओर ले जाएं। जैसा चित्र 1 में दिखया गया है। बाएं हाथ से बांए पैर का अंगूठा पकड़ें।ठीक एैसे ही दांए हाथ को पीछे की ओर ले जाकर दांए हाथ से दांए पैर के अंगूठे का पकड़ लें पद्मासन करने के लाभ जप, प्राणायाम, धारणा, ध्यान एवं समाधि के लिए इस आसन का उपयोग होता है। इस आसन से अंत: स्रावी ग्रंथियां (endocrine glands) की कार्यक्षमता बढती हैं। यह आसन दमा, अनिद्रा तथा हिस्टीरिया (उन्माद) जैसे रोग दूर करने में सहायक होता है। अनिद्रा के रोगियों के लिए तो यह आसन बहुत प्रभावकारी होता है। यह आसन शरीर की स्थूलता और मोटापा कम करने में भी सहायक होता है। इस आसन से जीवनशक्ति (vitality) की वृद्धि होती है। इस आसन के अभ्यास से जठराग्नि (पाचन तन्त्र) तीव्र बनती है और भूख भी बढ़ती है। मोट लोग यह आसन ना करें। कमर या हाथ की हड्डी यदि टूटी हुई हो तो वे भी इस आसन को ना करें। इस योग को किसी योग जानकार की रेख देख में ही करें। अर्धमत्स्येंद्रासन में सावधानी गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास नहीं करनी चाहिए। रीढ़ में अकड़न से पीडि़त व्यक्तियों को यह आसन सावधानीपूर्वक करना चाहिए। एसिडिटी या पेट में दर्द हो तो इस आसन के करने से बचना चाहिए। घुटने में ज़्यदा परेशानी होने से इस आसन के अभ्यास से बचें। गर्दन में दर्द होने से इसको सावधानीपूर्वक करें। -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Yoga For Weight Loss in Kanpur | Power Yoga in Kanpur | Yoga in Kanpur | Best Home Yoga Trainer in Kanpur | Group Yoga Classes in Kanpur | Yoga for Diabetes in Kanpur | Best Yoga Products in Kanpur | Best Yoga News in Kanpur | Yoga Classes in Kanpur | Best Yoga Instructor in Kanpur | Best Yoga Institute in Uttar Pradesh | Good Yoga Teachers in Kanpur | Best Yoga Courses in Uttar Pradesh | Best Yoga Classes in Kanpur | Top Yoga Classes in Kanpur | Best Yoga Center in Kanpur | Top Yoga Center in Kanpur | Best Yoga Courses in Kanpur | Yoga Teacher Courses in Kanpur | Sadhak Anshit | Yoga Classes By Sadhak Anshit | Sadhak Anshit Yoga Classes
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