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best meditation videos, meditation videos in kanpur, meditation best teachers in kanpur, meditation in india Sadhak Anshit साधक अंशित का जन्म 15 अगस्त 1985 को कानपुर शहर मे हुआ, ये योगी, आध्यात्मिक गुरू और दिव्‍यदर्शी हैं। उनको 'साधक' भी कहा जाता है। इनकी माता आशा जी एवं पिताजी अरूण जी है तथा इनकी पत्नी का नाम नेहा जी है । वे अपने तीन भाई बहनो मे सबसे बड़े है तथा वे स्टूडेंट एंड यूथ वेलफेयर एसोशियेशन 'सेवा' नामक लाभरहित मानव सेवी संस्‍था के संस्थापक हैं। सेवा संस्था उत्तर प्रदेश सहित भारत के कई राज्यों में योग तथा ध्यान विधि कार्यक्रम सिखाता है साथ ही साथ कई सामाजिक और सामुदायिक विकास योजनाओं पर भी काम करता है । प्रारंभिक जीवन साधक अंशित का जन्म 15 अगस्त 1985 को उत्तर प्रदेश राज्य के कानपुर शहर मे हुआ। उनके पिता भी एक ध्यानी पुरूष थे। बचपन से ही साधक अंशित प्रकृति प्रेमी थे तथा उन्हे कुदरत से बेहद लगाव था। समय समय पर अनायास ही वे अपनी स्वाभाविक सांसो को देखते देखते वे गहरे ध्‍यान मे चले जाया करते थे, जिससे वह बचपन से ही अन्य विषयों तथा वस्तुओं को औरो से ज्यादा बेहतर, स्पष्ट तथा अच्छा समझ पाते थे। उन्हें बाल्यावस्था से ही अच्छे तथा बुरे की अच्छी समझ थी। किशोरावस्था में कानपुर यूनिवर्सिटी से छात्रसंघ का चुनाव लड़कर वे बड़े अंतर से विजयी हुए तथा युवाओ के मध्य मे रहकर उन्होंने एक अच्छे मार्गदर्शक एवं पथप्रदर्शक की तरह उन्होंने समय समय पर उनका मार्गदर्शन किया तथा युवाओ के मध्य रहकर उन्होंने 'नशामुक्त युवा' का नारा देकर नशामुक्ती को लेकर व्यापक अभियान एवं कार्य किए तथा युवाओ को नशे की तरफ अग्रसरित होने से रोकने के लिए वे समय समय पर कार्य करते रहे। 24 वर्ष की उम्र मे इनकी भेंट योगगुरु ऋषि जी से हुई जिसके बाद इन्होंने योग एवं ध्यान का कठिन अभ्यास शुरू कर दिया तथा धीरे-धीरे इन्हें कई आध्यात्मिक अनुभव होते गए तथा इनकी आध्यात्मिक यात्रा ने एक नया आयाम ले लिया जिससे वे आमजन मानस के मध्य एक साधक तथा आध्यात्मिक गुरु के रूप मे स्थापित होते गए। इन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से एम•काम की परास्नातक की डिग्री के साथ साथ शारीरिक शिक्षा की भी डिग्री प्राप्त की। तथा इन्होंने प्राचीन ध्यान विधि विपश्यना को अपनाकर कड़ी साधना की तथा इस साधना में इन्होंने अपने आप को तपाया जिसके फलस्वरूप ही ये अपने जीवन को एक नई दिशा दे पाऐ। आध्यात्मिक अनुभव 25 वर्ष की उम्र में अनायास ही बड़े विचित्र रूप से, इनको गहन आत्‍म अनुभूति हुई, जिसने इनके जीवन की दिशा को ही बदल दिया। देहरादून के एक आश्रम मे वे रात्रि ध्यान साधना मे बैठे थे तभी उनका मस्तिष्क निर्विचार अवस्था पर पहुँच गया तथा ठीक उसी समय अचानक, उन्‍हें शरीर से परे का अनुभव हुआ। उन्हें लगा कि वह अपने शरीर में नहीं हैं तथा उन्हे अपने एक और शरीर का अनुभव होने लगा, धीरे-धीरे समय के साथ वे अपनी ध्यान साधना को और गहरी करते चले गए जिससे उन्हे अन्य कई दिव्य लौकिक एवं अलौकिक अनुभव हुए। फिर उन्होंने अपने इन अनुभवों तथा अपनी इन ध्यान विधियों को इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड के हर एक आमजन-मानस तक पहुंचाने का संकल्प लिया जो अपने सत्य मार्ग से भटककर अन्य विषयों पर लगे हुए है, उनका कहना है कि जिस परमानंद की अनुभूति उन्हे हुई वो अनुभूति हर उस व्यक्ति को होनी चाहिए जो कि भौतिक संसार के मध्य काम, क्रोध, लोभ, मोह, माया तथा आलस्य से ग्रसित है। सेवा संस्था स्टूडेंट एंड यूथ वेलफेयर एसोशियेशन (सेवा) संस्था का निर्माण भले ही इन्होंने युवा वर्ग को अपने मस्तिष्क मे रखकर किया था परन्तु समय के साथ साथ इन्होंने अपनी इस संस्था मे नशामुक्ती से पीड़ित इस युवा वर्ग को जगाने के कार्य के साथ साथ गरीब बच्चो की शिक्षा के लिए झुग्गी झोपड़ियों मे जाकर एकल विद्यालय कार्यक्रम भी चलाए तथा कई होनहार गरीब बच्चो की मदद भी करी बाद मे इन्होने अपनी संस्था को शिवा योग संस्थान के साथ जोड़कर इस देश के कई प्रान्तों मे योग तथा ध्यान विधि के कई कार्यक्रम चलाए तथा अनवरत रूप से कर भी रहे हैं तथा आमजन-मानस को अपनी प्राचीन सभ्यता से जोड़कर उन्हे सत्य तथा धर्म के मार्ग पर प्रशस्त करने का भी कार्य समय-समय पर करते रहे है और वर्तमान समय में भी कर रहे हैं। शिवा योग केंद्र शिवा योग केंद्र का प्रारंभ एकमात्र इस दूरगामी सोच के साथ किया गया कि इस योग केंद्र मे आने वाला हर व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्ति के बारे मे जान सके तथा योग एवं ध्यान साधना के माध्यम से वह उस असाध्य मार्ग के मध्य से भी मार्ग तलाशने मे निपुण हो जाए जो मार्ग कभी उसके लिए दुष्कर एवं असंभव था । आंतरिक विकास की यात्रा के लिए बनाया गया यह शक्तिशाली स्थान योग के चार मुख्य मार्ग - ज्ञान, कर्म, क्रिया और भक्ति को लोगों तक पहुंचाने के प्रति समर्पित है। click down for videos https://www.youtube.com/watch?v=xBQo7MMgrtg& t=41s https://www.youtube.com/watch?v=2dwDBuk_yZQ https://www.youtube.com/watch?v=RPgD41NvHcg
  • 2017-09-10T15:37:52

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बद्ध पद्मासन पद्मासन का अर्थ और उसके करने का तरीका : “पद्म” अर्थात् कमल। जब यह आसन किया जाता है, उस समय वह कमल के समान दिखाई पड़ता है। इसलिए इसे ‘पद्मासन’ नाम दिया गया है। यह आसन “कमलासन’ के नाम से भी जाना जाता है। ध्यान एवं जाप के लिए इस आसन का मुख्य स्थान होता है। यह आसन पुरुषों और स्त्रियों दोनों के लिए अनुकूल योग में बद्ध पद्मासन एक विशेष स्थान रखता है। बद्ध पद्मासन में दोनों हाथों से शरीर को बांधा जाता है। इसलिए इसे बद्ध पद्मासन कहा जाता है। इस आसन को भस्मासन भी कहा जाता है। यह आसन कठिन आसनों में से एक है। वैदिक वाटिका आपको बता रही है बद्ध पद्मासन के फायदे और इसे करने का तरीका। सबसे पहले जानते हैं बद्ध पद्मासन योग के फायदे इस आसन से : दुबलापन दूर होता है और शरीर में ताकत आती है। छाती चौड़ी होती है। गर्दन, पीठ और पीठ का दर्द ठीक होता है। जो लोग कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं उनके लिए यह आसन बहुत फायदेमंद होता है। फेफड़े, जिगर और दिल संबंधी रोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। रक्त संचार तेज होता है। बद्ध पद्मासन करने की विधि भूमि पर दोनों पैर फैला कर सीधे बैठे। फिर दायाँ पैर बाएँ पैर की जाँघ पर और बायाँ पैर दाएँ पैर की जाँघ पर रखें। वैसे कुछ लोगों को पहले दाएँ जाँघ पर बायाँ पैर और फिर बाई जाँघ पर दायाँ पैर रखने में आसानी होती है।आप चाहे तो ऐसा भी कर सकते है। फिर इमेज (चित्र) में बताए अनुसार दोनों हाथों के अंगूठो को तर्जनियों के साथ मिला कर बायाँ हाथ बाएँ पैर के घुटने पर और दायाँ हाथ दाएँ पैर के घुटने पर रखें। याद रहे की हथेलियाँ ऊपर की ओर हों। मेरुदंड और मस्तक सीधी रेखा में रखें। आँखों को बंद या खुली रखें। सबसे पहले आप जमीन पर कोई दरी या कंबल बिछाकर बैठ जाएं। आपकी एड़ियां पेट के निचले भाग से सटी हुई हों। पंजे जांघों से बाहर निकालें अब अपनी बांई भुजा को पीछे की ओर ले जाएं। जैसा चित्र 1 में दिखया गया है। बाएं हाथ से बांए पैर का अंगूठा पकड़ें।ठीक एैसे ही दांए हाथ को पीछे की ओर ले जाकर दांए हाथ से दांए पैर के अंगूठे का पकड़ लें पद्मासन करने के लाभ जप, प्राणायाम, धारणा, ध्यान एवं समाधि के लिए इस आसन का उपयोग होता है। इस आसन से अंत: स्रावी ग्रंथियां (endocrine glands) की कार्यक्षमता बढती हैं। यह आसन दमा, अनिद्रा तथा हिस्टीरिया (उन्माद) जैसे रोग दूर करने में सहायक होता है। अनिद्रा के रोगियों के लिए तो यह आसन बहुत प्रभावकारी होता है। यह आसन शरीर की स्थूलता और मोटापा कम करने में भी सहायक होता है। इस आसन से जीवनशक्ति (vitality) की वृद्धि होती है। इस आसन के अभ्यास से जठराग्नि (पाचन तन्त्र) तीव्र बनती है और भूख भी बढ़ती है। मोट लोग यह आसन ना करें। कमर या हाथ की हड्डी यदि टूटी हुई हो तो वे भी इस आसन को ना करें। इस योग को किसी योग जानकार की रेख देख में ही करें। अर्धमत्स्येंद्रासन में सावधानी गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास नहीं करनी चाहिए। रीढ़ में अकड़न से पीडि़त व्यक्तियों को यह आसन सावधानीपूर्वक करना चाहिए। एसिडिटी या पेट में दर्द हो तो इस आसन के करने से बचना चाहिए। घुटने में ज़्यदा परेशानी होने से इस आसन के अभ्यास से बचें। गर्दन में दर्द होने से इसको सावधानीपूर्वक करें। -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Yoga For Weight Loss in Kanpur | Power Yoga in Kanpur | Yoga in Kanpur | Best Home Yoga Trainer in Kanpur | Group Yoga Classes in Kanpur | Yoga for Diabetes in Kanpur | Best Yoga Products in Kanpur | Best Yoga News in Kanpur | Yoga Classes in Kanpur | Best Yoga Instructor in Kanpur | Best Yoga Institute in Uttar Pradesh | Good Yoga Teachers in Kanpur | Best Yoga Courses in Uttar Pradesh | Best Yoga Classes in Kanpur | Top Yoga Classes in Kanpur | Best Yoga Center in Kanpur | Top Yoga Center in Kanpur | Best Yoga Courses in Kanpur | Yoga Teacher Courses in Kanpur | Sadhak Anshit | Yoga Classes By Sadhak Anshit | Sadhak Anshit Yoga Classes
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