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Home All Updates (220) Urdhva Upavistha Kon
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Urdhva Upavistha Konasana Upavistha konasana is a seated forward bend that requires flexibility. From a seated position, the legs are spread wide and the upper body folds forward. In addition to a range of physical benefits, this pose calms the mind and the nervous system. The term comes from the Sanskrit upavistha,  meaning “seated” or “sitting, ” kona, meaning “angle, ” and asana, meaning “pose” or “posture.” The common English name for upavistha konasana is wide angle seated forward bend. It is also sometimes referred to as simply seated angle pose. Traditionally, upavistha konasana is thought to activate the second chakra,  svadisthana, thereby opening the center of creativity, pleasure and enjoyment. Practicing this pose opens the mind to new possibilities while encouraging self-acceptance. As with other forward bends, upavistha konasana quiets the mind. Upavistha konasana is a foundational pose in many schools of yoga and part of the primary series of Ashtanga yoga. It prepares the body for other seated forward bends and twists, as well as for the wide-legged standing asanas. Often performed following this asana is the related pose,  urdhva upavistha konasana(upward wide angle seated forward bend), in which the legs are lifted off the ground. If you can't straighten your legs while holding onto your feet, keep your knees bent or loop a strap or belt around each foot. To help find your balance with straightened legs and straight spine, position a blanket roll just behind your pelvis, this will help support your lower back and help your balance. ↑          Precaution of urdhva upavistha konasana Hamstring or groin pull or tear. Lower-back injury. Herniated disk.         Procedure of urdhva upavistha konasana You can start by sitting in Baddha Konasana. Hook your first two fingers around your big toes. Exhale and tilt back, balancing on your sit bones. Inhale and straighten your legs. Keep your legs active and the kneecaps pulled up. Keep your chest lifted and open, shoulders down and your spine extended.         Benefits of urdhva upavistha konasana Improves balance. Strengthens and tones the abs, spine and legs. Massage the entire spinal column. Stimulates the internal organs.  ________________________________________________________________________________ Best Yoga Courses in Uttar Pradesh | Best Yoga Classes in Kanpur | Top Yoga Classes in Kanpur | Best Yoga Center in Kanpur | Top Yoga Center in Kanpur | Best Yoga Courses in Kanpur | Yoga Teacher Courses in Kanpur | Sadhak Anshit | Yoga Classes By Sadhak Anshit | Sadhak Anshit Yoga Classes
  • 2019-04-11T08:09:50

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बद्धकोणासन करने की विधि और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ: बद्धकोणासन आसन को कोबलर पोज या बटरफ्लाई पोज भी कहते हैं। यह आसन अन्य आसनों की तुलना में ज्यादा सरल है और इसे आसानी से किया जा सकता है। अक्सर मोची इसी मुद्रा में बैठकर अपना काम करते हैं। इस आसन में कूल्हों को खोलकर पैरों को जोड़कर बैठा जाता है और तितली की तरह ऊपर नीचे हिलते हैं। इस मोशन को बटरफ्लाई मोशन कहते हैं। तो आइए इस आसन को करने की सही विधि और इससे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।  बद्धकोणासन करने से पहले याद रखें यह बातें: यह आसन सुबह जल्दी उठकर किसी अन्य आसन के साथ किया जाता है। लेकिन अगर आप सुबह जल्दी नहीं उठ पाते हैं तो आप यह आसन शाम को भी कर सकते हैं। बस ध्यान रहे आपके आसन करने और आपके भोजन में कम से कम 4-6 घंटे का अंतर हो। ताकि आसन करने तक आपका भोजन पूरी तरह से पच जाए। बद्धकोणासन करने के तरीके: •सीधा बैठे और अपने पैरों को स्ट्रैच करें। अब सांस लें और अपने घुटनों को इस तरह से मोड़ें की आपकी एड़ी पेल्विस की तरफ हो। •आप अपनी एड़ियों को पेल्विस के पास जितना ला सकते हैं लाएं। अब अपने हाथ के अंगूठे और पहली अंगुली का इस्तेमाल करते हुए अपने पैर के अंगूठे को पकड़ें। ध्यान रहे अपने पैरों के बाहरी किनारों को हमेशा फर्श पर दबाएं। •एक बार जब आप इस मुद्रा में सहज हो जाएं तो जल्दी से जांच लें कि क्या आपकी प्यूबिस और टेलबोन फर्श से समान दूरी पर हैं। पेल्विस सामान दूरी पर होनी चाहिए और पेराइनम(मूलाधार) फर्श के समानांतर होना चाहिए। ध्यान रहे आपके कंधे और कमर सीधे होने चाहिए। •हमेशा ध्यान रखें कि आपके घुटने जमीन की तरफ ना झुकें। अपने जांघ की हड्डियों को जमीन से स्पर्श कराने की कोशिश करें। ऐसा करने से अपने आप आपके घुटने जरुरत के हिसाब से नीचे झुकेंगे। इस मुद्रा में 1-5 मिनट तक रहें। सांस लें और अपने घुटनों को उठाएं और पैरों को फैलाएं।  बद्धकोणासन करने के फायदे: •यह आसन प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह करने से डिलिवरी के समय आराम मिलता है। •बद्धकोणासन करने से महिलाओं के प्रजनन सिस्टम के कार्य में वृद्धि होती है। •यह पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण का सुधार करने में मदद करता है। •यह आसन तनाव दूर करने में लाभदायक है साथ ही थकान को दूर करने में भी मदद करता है। •इस आसन को करने से अस्थमा, इनफर्टिलिटी और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से राहत मिलती है। •यह एक अच्छी मुद्रा है तो रीढ़ की हड्डी में खिचाव लाती है। बद्धकोणासन करते समय बरते यह सावधानियां: •अगर आपके घुटने में चोट लगी हुई है तो यह आसन नहीं करना चाहिए। •मासिक धर्म के दौरान यह आसन ना करें। •अगर आप साइऐटिका से पीड़ित हैं तो इस आसन को करने के लिए तकीये पर बैठे। ------------------------------------------------------------ Best Yoga Classes in Kanpur | Top Yoga Classes in Kanpur | Best Yoga Center in Kanpur | Top Yoga Center in Kanpur | Best Yoga Courses in Kanpur | Yoga Teacher Courses in Kanpur | Sadhak Anshit | Yoga Classes By Sadhak Anshit | Sadhak Anshit Yoga Classes
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